कलिंगा लिटरेरी फेस्टिवल भाव संवाद में जुटे मैथिली और गुजराती भाषा के साहित्यकार

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कलिंगा लिटरेरी फेस्टिवल भाव संवाद में जुटे मैथिली और गुजराती भाषा के साहित्यकार


स्थानीय भाषाओं में साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कलिंगा लिटरेरी फेस्टिवल ने गुजराती (Gujarati literature) और मैथिली साहित्य पर (Maithili literature) भाव संवाद (Bhava Samvad) का आयोजन किया. वर्चुअल माध्यम से हुए भाव संवादों ने दोनों ही भाषाओं के दिग्गज साहित्यकारों ने शिरकत की.

गुजराती साहित्य भाव संवाद में वरिष्ठ लेखक तुषार शुक्ला (author Tushar Shukla) और रीमा शाह ने गुजराती भाषा में गढ़े जा रहे साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा की.

मैथिली साहित्य भाव संवाद में मैथिली साहित्यकार श्याम दरिहरे (Shyam Darihare) और डॉक्टर कमल मोहन चुन्नू के बीच मैथिली साहित्य पर सिलसिलेवार बातचीत हुई. इस अवसर पर श्याम दरिहरे की नई किताब बाती कोन जराऊ (Baati Kon Jarau) का भी विमोचन किया गया.

‘बाती कोन जराऊ’ मैथिली भाषा का एक चर्चित उपन्यास है. उपन्यासकार श्याम दरिहरे ने इस उपन्यास में एक ऐसी निर्धन और दलित महिला शोभना के जीवन संघर्ष को प्रस्तुत किया है जो बेगूसराय जनपद के एक छोटे से गांव में पैदा हुई. गरीब और दलित होने के कारण उसे अपने ही गांव में कई तरह के पारिवारिक और सामाजिक शोषण-उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा. शोभना को उसके सुंदर होने की सजा बलात्कार के रूप में भोगनी पड़ती है. शादी के बाद भी शोभना और उसके परिवार को दबंगों के अत्याचारों का सामना करना पड़ता है.

KLF Bhava Samvad

श्याम दरिहरे ने अपने लेखन के माध्यम से स्त्री विमर्श और दलितों के उत्पीड़न को प्रस्तुत किया है.

श्याम दरिहरे ने इस उपन्यास के माध्यम से स्त्री विमर्श और दलितों के उत्पीड़न को प्रस्तुत किया गया है.

श्याम दरिहरे (Shyam Darihare) झारखंड में डिविजनल कमान्डेन्ट के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं. उनके मैथिली भाषा में कई कथा संग्रह, उपन्यास और कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. आप धर्मवीर भारती की रचना कनुप्रिया का मैथिली में अनुवाद कर चुके हैं. 2013 में प्रकाशित कथा संग्रह बड़की काकी एट हॉटमेल डॉट कॉम के लिए उन्हें वर्ष 2016 के साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

डॉक्टर कमल मोहन चुन्नू बिहार के सहरसा के एक कॉलेज में मैथिली विभाग में बतौर सहायक प्राध्यापक सेवाएं दे रहे हैं.

कलिंगा लिटरेरी फेस्टिवल भाव संवाद (KLF Bhava Samvad)

महामारी के कारण लॉकडाउन के दौरान साहित्यिक भावना को बरकरार रखने के लिए ‘कलिंगा लिटरेरी फेस्टिवल भाव संवाद’ शुरू किया गया है. कलिंगा लिट फेस्ट ने पिछले साल 17 मई को वर्चुअल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ‘केएलएफ भाव संवाद’ की शुरूआत की थी. यह एक ऐसी अनूठी पहल थी कि चंद साहित्यकारों से शुरू हुआ यह संवाद लगातार बढ़ता ही चला गया और देशभर के लेखक इससे जुड़ते चले गए.



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