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दुनिया के प्राचीन फलों में से एक है अनार, धर्मग्रंथों में भी है विशेषताओं का ज़िक्र


आपने एक कहावत सुनी ही होगी कि ‘एक अनार, सौ बीमार.’ इसका अर्थ यही है कि एक अकेला अनार सौ बीमार या बीमारियों को ठीक कर सकता है. जब हमने खोजबीन की तो वाकई जाहिर हुआ कि अनार गजब का फल है. यह बीमारियों से तो निजात दिलाता ही है, साथ ही शरीर को भी स्वस्थ रखता है. यह फल इसलिए भी विशेष माना गया है कि विश्व के तीन धर्मों हिंदू, इस्लाम और इसाई के प्रमुख ग्रंथों में इसका वर्णन है.

खाओ अनार, यौवन लौट आएगा

अनार को लेकर मिस्र की एक प्राचीन कहावत भी है कि ‘अनार खाओ और स्नान करने को जाओ, तेरा यौवन शीघ्र लौटेगा.’ पहले इस फल का आगा-पीछा समझ लें. अनार की उत्पत्ति भी हजारों साल पुरानी है. अगर यह कहा जाए कि अनार का इतिहास बड़ा ही रोचक, श्रद्धा से भरा और लंबा है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. इसमें कोई दो-राय नहीं कि यह प्राचीन फल है, क्योंकि मिस्र की प्राचीन कथाओं के अलावा सिंधु घाटी की सभ्यता में भी इसके बारे में पता चलता है. कहा यह भी जा रहा है कि यह फल संभवतः फारस में उत्पन्न हुआ था, उसके बाद अरब, अफगानिस्तान, भारत और चीन तक में फैल गया.

जार्ज किंग का दावा, भारत का है अनार

वर्ष 1877 में जार्ज किंग ने ‘The Materia Medica of the Hindu’ नाम से एक पुस्तक लिखी है. उनका कहना है कि अनार की उत्पत्ति उत्तर पश्चिमी भारत में हुई है. इस मसले को थोड़ा विस्तृत तौर पर देखा जाए तो यह बात स्पष्ट होती नजर आती है कि अनार की उत्पत्ति हिमालय से लेकर मध्य पूर्व तक फैले क्षेत्रों में ही हुई है. इस आंकलन से देखा जाए तो इसकी खेती मिस्र, अफगानिस्तान, ईरान, इराक, भारत, बर्मा, चीन और सऊदी अरब के क्षेत्र में ही होती रही है.

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अनार की खेती मिस्र, अफगानिस्तान, ईरान, इराक, भारत, बर्मा, चीन और सऊदी अरब के क्षेत्र में ही होती रही है.

दुनिया के तीन बड़े धर्मों की पुस्तकों में है गुणगान

विश्व के तीन बड़े धर्मों की पवित्र पुस्तकों में भी अनार का वर्णन है. हिंदू धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि अनार के पौधे में विष्णु-लक्ष्मी का वास होता है. इसे घर में लगाने से पैसों की तंगी नहीं आती है. इसे उर्वरता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है. इस्लाम धर्म के पवित्र ग्रंथ कुरान-शरीफ में जिन छह फलों का जिक्र किया गया है, उनमें अनार भी शामिल है. ग्रंथ में कहा गया है कि अनार के पेड़ स्वर्ग के राज्य में उगते हैं. इसाई धर्म के पवित्र ग्रंथ बाइबिल में भी अनार का कई संदर्भ में जिक्र हे. एक स्थान पर इसका जिक्र फलदायकता, आशीष और समृद्धि के साथ जोड़ा गया है.

काबुल और कंधार के अनार का जवाब नहीं

अफगानिस्तान और भारत के अनार स्वाद व रंग के मसले में श्रेष्ठ माने जाते हैं. वैसे ईरान व स्पेन में भी अनार खूब मिलता है. महाराष्ट्र का सोलापुर जिला ऐसा है जो पूरे भारत के अनार का 60 से 70 प्रतिशत अनार उगाता है. अफगानिस्तान में कंधार व काबुल के अनार पूरी दुनिया में मशहूर हैं. भारत में देसी और अफगानी अनार की खपत है. देशी अनार खट्टे-मीठे होते हैं, कन्धार के अनार मीठे होते हैं, काबुल के अनार भी मीठे होते हैं और इसकी एक प्रजाति में गुठली नहीं होती और वह बहुत ही मीठी होती है. इसे बेदाना कहते हैं.

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महाराष्ट्र का सोलापुर जिला ऐसा है जो पूरे भारत के अनार का 60 से 70 प्रतिशत अनार उगाता है.

विटामिन्स और मिनरल से भरपूर है अनार

स्वास्थ्य के हिसाब से अनार बेहद लाभकारी हैं. आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में इसे दाड़िम कहा गया है. यह स्निग्ध, गरम व हृदय के लिए लाभकारी है. अनार पित्त को नष्ट करता है और मीठा अनार ही
सर्वश्रेष्ठ है. फूड एक्सपर्ट व न्यूट्रिशियन कंसलटेंट नीलांजना सिंह के अनार में फाइबर, विटामिन सी, बी, आयरन, पोटेशियम, जिंक और ओमेगा-6 फैटी एसिड आदि ढेरों मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए बेहद लाभकारी हैं. जब भी कोई व्यक्ति बीमार होता है तो उसे अनार खाने की सलाह दी जाती है. अनार खाना हमारी बीमारियों को ही दूर नहीं करता है बल्कि यह सेहत के लिए रामबाण होता है. उन्होंने कहा कि ज्यादा अनार का सेवन करने से गैस की समस्या हो जाती है, इसके अलावा जिन लोगों को खांसी की समस्या है, उन्हें अनार से परहेज करना चाहिए. जो लोग डाइट कर रहे हैं, उन्हें भी अनार नहीं खाना चाहिए.

Tags: Food, Lifestyle



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