Tuesday, June 22, 2021
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Covid reduced carbon emissions by 85% in tech outsourcing industry in India: Report | इंडस्ट्री में वर्क फ्रॉम होम का चलन बढ़ा, गाड़ी के कम इस्तेमाल से IT कंपनियों का ट्रैवल कॉस्ट 215 करोड़ घटा


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नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले

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कोरोना की वजह ज्यादा तर कंपनियों के कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं। दरअसल हम सरकारी आफिसों, बैंकों, मेडिकल स्टोरों, फल-सब्जी और राशन की दुकानों में जाने के लिए जिन गाड़ियों का उपयोग करते है उनसे समय, पैसा दोनों बर्बाद करना पड़ता है। यह पर्यारण को भी नुकसान पहुंचाते हैं। लॉकडाउन से लोगों को कई समस्या हुई हैं। लेकिन इससे पर्यावरण को बहुत फायदा पहुंचा है।

मार्केट रिसर्च फर्म की 4 जून की एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रैवलिंग, वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन हायरिंग की वजह से भारतीय आईटी आउटसोर्सिंग इंडस्ट्रीज से कार्बन का उत्सर्जन लगभग 85% कम हो गया है। जो कि सिर्फ 0.3 लाख टन है। वहीं वित्त वर्ष 2021 में टॉप 5 आईटी कंपनियां TCS, इंफोसिस, HCL, Wipro और टेक महिंद्रा के यात्रा वाला खर्च लगभग 75% घटकर 37 करोड़ रुपए (370 मिलियन डॉलर) हो गया, जो कि वित्त वर्ष 2020 की तुलना में 140 करोड़ रुपए (1.4 बिलियन डॉलर) कम है।

सिर्फ 5% ही यात्रा करते हैं

इस स्टडी से पता चलता है इस वर्ष के दौरान कार्बन उत्सर्जन में कमी जारी रहेगी। जिसके 85% तक कम होने का अनुमान है। महामारी से पहले कार्बन उत्सर्जन लगभग 2 लाख टन था। जो कि लगभग 0.3 लाख टन हो गया है। स्टडी से पता चला है कि आज आउटसोर्सिंग इंडस्ट्रीज में लगभग 44 लाख कर्मचारियों में से केवल 4 से 5% ही काम करने के लिए यात्रा कर रहे हैं। बाकी सभी वर्क फ्रॉम होम पर हैं।

इलेक्ट्रिक वाहनों का करना होगा उपयोग

अनअर्थसाइट बेंचमार्किंग विश्लेषण का अनुमान है कि भारतीय आईटी आउटसोर्सिंग ने वित्त वर्ष 2020-21 में यात्रा लागत पर केवल 75 करोड़ रुपए (750 मिलियन डॉलर) खर्च किए, जबकि वित्त वर्ष 2019-20 में यह 290 करोड़ रुपए था। इसके अलावा, भारतीय आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री ने अपने कर्मचारियों को लाने ले जाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने की योजना बना रही है। जिससे कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सहायता मिलेगी।

इसे आगे भी जारी रखना होगा

अनअर्थ इनसाइट के संस्थापक और सीईओ गौरव वासु के अनुसार, आउटसोर्सिंग उद्योग कोविड से पहले भी हाइब्रिड वर्किंग मॉडल, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाने की राह पर था। हालांकि, महामारी और डिजिटल टूल्स और टेक्नोलॉजी को तेजी से अपनाया जा रहा है। जिससे तस्वीर बदलती हुई नजर आ रही है। यदि कोविड के बाद भी यही चीजें जारी रहेंगी तो कार्बन उत्सर्जन लम्बे समय तक नहीं बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि कोविड 19 की वजह से पर्यावरण आउटसोर्सिंग आर्गेनाइजेशन , कस्टमर और कर्मचारियों के लिए अनुकूल बन गया है, जिससे उन्हें कार्बन को कम करने वाले लक्ष्य तक तेजी से पहुंच सकते हैं।

IT कंपनियां कार्बन उत्सर्जन कम करने में योगदान दे रही हैं

महामारी से पहले भी TCS, इंफोसिस, HCL, विप्रो, टेक महिंद्रा, यूनिसिस, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, ओरेकल जैसी टेक कंपनियां इस ओर पहल कर रही थी। इसके लिए उन्होंने कर्मचारी के लिए इलेक्ट्रिक वाहन को अपनाया था। जो कि डिजिटल कर्मचारी ट्रांसपोर्टेशन ऐप ले जोड़ा गया है। ताकि कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सके। अध्ययन का अनुमान है कि ग्लोबल और घरेलू IT फर्मों के कर्मचारियों और परिवारों के टीकाकरण होने के बाद इंडस्ट्री में लोग आना शुरू हो जाएंगे। जिससे ऑफिस में 20 से 25% से अधिक कर्मचारी काम पर वापस आ जाएंगे।

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