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Neuralink implanted a chip in the brain of the first human patient | मस्क की कंपनी न्यूरालिंक ने इंसानी दिमाग में चिप लगाई: बिजनेसमैन बोले- पेशेंट की रिकवरी बेहतर; पैरालिसिस का मरीज चल-फिर सकेगा, दृष्टिहीन देख पाएंगे


नई दिल्ली38 मिनट पहले

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डिवाइस एक छोटे सिक्के के आकार की है, जो ह्यूमन ब्रेन और कंप्यूटर के बीच सीधे कम्युनिकेशन स्थापित करेगी। - Dainik Bhaskar

डिवाइस एक छोटे सिक्के के आकार की है, जो ह्यूमन ब्रेन और कंप्यूटर के बीच सीधे कम्युनिकेशन स्थापित करेगी।

टेस्ला और स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्‍क के स्टार्टअप न्यूरालिंक ने इंसान के दिमाग में सर्जरी के जरिए चिप इम्प्लांट की है। यह डिवाइस एक छोटे सिक्के के आकार की है, जो ह्यूमन ब्रेन और कंप्यूटर के बीच सीधे कम्युनिकेशन चैनल बनाएगा। दिमाग में चिप लगाने का यह पहला मामला है।

अगर ह्यूमन ट्रायल कामयाब रहा तो चिप के जरिए दृष्टिहीन लोग देख पाएंगे। पैरालिसिस के मरीज चल-फिर और कंप्यूटर चला सकेंगे। कंपनी ने चिप का नाम ‘टेलीपैथी’ रखा है। इस बात की जानकारी मस्क ने अपने सोशल मीडिया हैंडल X पर दी।

मस्क ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, ‘पहले इंसान में हमारी कंपनी न्यूरालिंक ने डिवाइस इम्प्लांट की। पेशेंट अच्छी तरह से रिकवर कर रहा है। शुरुआती रिजल्ट आशाजनक हैं।’

सितंबर 2023 में मिली थी मंजूरी
सितंबर 2023 में मस्क की ब्रेन-चिप कंपनी न्यूरालिंक को अपने पहले ह्यूमन ट्रायल के लिए इंडिपेंडेंट इंस्टीट्यूशनल रीव्यू बोर्ड से रिक्रूटमेंट की मंजूरी मिल मिली थी। यानी मंजूरी के बाद न्यूरालिंक ह्यूमन ट्रायल के लिए लोगों की भर्ती कर कर उन पर इस डिवाइस का ट्रायल करेगा।

न्यूरालिंक का सर्जिकल रोबोट, जिसके जरिए चिप को मस्तिष्क में लगाया गया है।

न्यूरालिंक का सर्जिकल रोबोट, जिसके जरिए चिप को मस्तिष्क में लगाया गया है।

स्टडी को पूरा होने में करीब 6 साल लगेंगे
न्यूरालिंक के मुताबिक, ट्रायल उन लोगो पर किया जा रहा है, जिन लोगों को सर्वाइकल स्पाइनल कॉर्ड में चोट या एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS) के कारण क्वाड्रिप्लेजिया है। इस ट्रायल में हिस्सा लेने वालों की उम्र मिनिमम 22 साल होनी चाहिए। स्टडी को पूरा होने में करीब 6 साल लगेंगे। इस दौरान पार्टिसिपेंट को लैब तक आने-जाने का ट्रैवल एक्सपेंस मिलेगा।

ट्रायल के जरिए कंपनी यह देखना चाहती है कि डिवाइस मरीजों पर कैसे काम कर रही है। हालांकि, कंपनी ने अभी यह नहीं बताया है कि ट्रायल कब शुरू होगा या इसमें कितने प्रतिभागी शामिल होंगे। इससे पहले मई में कंपनी को ट्रायल के लिए यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) से मंजूरी मिली थी।

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एलन मस्क की ब्रेन-चिप कंपनी न्यूरालिंक को अपने पहले ह्यूमन ट्रायल के लिए इंडिपेंडेंट इंस्टिट्यूशनल रिव्यू बोर्ड से रिक्रूटमेंट की मंजूरी मिल गई है। यानी अब न्यूरालिंक ह्यूमन ट्रायल के लिए लोगों की भर्ती कर सकेगी। अगर ह्यूमन ट्रायल कामयाब रहा तो चिप के जरिए ब्लाइंड भी देख सकेंगे। पैरालिसिस से पीड़ित मरीज सोचकर कंप्यूटर चला सकेंगे। पूरी खबर पढने के लिए यहां क्लिक करें…

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Mr.Mario
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