Thursday, July 29, 2021
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sindhi mouth kachori in delhi pitampura made with pulses boiled in milk and special spices rada– News18 Hindi


(डॉ. रामेश्वर दयाल)

आज हम आपको कम दामों पर एक लाजवाब डिश का स्वाद चखवाते हैं. इस डिश के दाम चाहे कम हों लेकिन स्वाद में इसका कोई तोड़ नहीं है. उसका कारण है कि इस डिश की दाल को दूध में उबाला जाता है. फिर कचौड़ियों को दाल में तर कर ऊपर से पीले चावल, फिर इमली की खटाई, उसके बाद स्पेशल मसाला डालकर अंत में जब कटी प्याज डाली जाती है और नींबू छिड़का जाता है तो स्वाद ऐसा निखरता है कि खाते हुए संतोष का भाव पैदा होता है. इस स्वादिष्ट डिश का नाम है ‘सिंधी मोठ कचौड़ी’. यह जुबान को इतना भाती है कि एक प्लेट से काम नहीं चल पाता.

मोठ दाल को तमाड़ी में डालकर दूध में घंटो उबाला जाता है

इस सिंधी मोठ कचौड़ी का ठिया है उत्तरी पीतमपुरा स्थित इनकम टैक्स कॉलोनी के पास. जब इस कॉलोनी से आगे चलेंगे तो क्यू ब्लॉक के पास दाएं ओर दिख जाएगा यह ठिया. पहले इस डिश की दास्तां सुन लेते हैं. सबसे पहले रात को मोठ दाल को पानी में भिगो दिया जाता है. फिर सुबह इस दाल को तमाड़ी (मटके जैसा) में डाल पर्याप्त दूध में उबाला जाता है. जब यह उबल जाती है तो इसमें नमक डालकर छोड़ दिया जाता है. चूंकि यह मोठ कचौड़ी है तो इसके लिए कचौड़ी भी बनाई जाती है. उड़द की दाल और मसालों की पिट्ठी बनाकर उसे मैदा की लोई में भरकर कचौड़ी को वनस्पति में तला जाता है. कुल मिलाकर इस सिंधी मोठ कचौड़ी का बेस तैयार हो गया. साथ में हल्दी डालकर चावल भी उबाल लिए जाते हैं.

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गजब तरीके से बनाकर पेश की जाती है सिंधी मोठ कचौड़ी

फिर यह सारा सामान ठिए पर पहुंच जाता है तो इसकी बिक्री शुरू हो जाती है. इस डिश की एक प्लेट, जिसमें दो कचौड़ी होती है, 30 रुपये की है. सिंगल कचौड़ी चाहिए तो वह 20 रुपये में हाजिर है. इसे सर्व करने का तरीका खासा रोचक है. लोग ज्यादातर कचौड़ी को क्रश करवाकर खाते हैं. उसका कारण यह है कि इससे स्वाद उभरकर आता है. दोने में कचौड़ी क्रश करने के बाद नमक वाली गाढ़ी मोठ दाल की तरावट की जाती है. उसके ऊपर पीले चावल की लेयर बिछाई जाती है. फिर डिश में इमली की खटाई व हाथ के बनाए मसाले डाले जाते हैं. इसके बाद चम्मच से इसे मिक्स किया जाता है. फाइनली, एक बार फिर ऊपर से कटी प्याज व नींबू छिड़का जाता है. मन है तो साथ में अचारी मिर्च भी दी जाती है. तैयार हो गई सिंधी मोठ कचौड़ी.

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दादी से सीखा था सिंधी मोठ कचौड़ी बनाने का तरीका

इस ठिए को बबलू चलाते हैं. उन्होंने इस डिश को खिलाने की शुरुआत साल 1996 से की थी. उन्होंने बताया कि बचपन में दादी इस डिश को बनाकर खिलाती थी. परिवार को बड़ा ही आनंद आता था. जब वह कमाने लायक हुए तो सोचा कि यही डिश को लोगों को खिलाई जाए. शुरू में इस डिश का दाम 10 रुपये था. लोगों को स्वाद पसंद आ गया और उनका धंधा चल गया. यह डिश लोगों की जुबान को चटपटा बनाने लगी. इस डिश की बढ़िया पैकिंग की भी सुविधा है. लोग ठिए पर आकर सिंधी मोठ कचौड़ी खाते हैं और परिजनों व मित्रों के लिए पैक करवाकर ले जाते हैं.



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